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India's communal forces have very little respect for methods of history writing

By Dr Abhay Kumar

It is a matter of great concern that the communal forces are distorting Indian history and changing the content of textbooks to create an ideological justification for their sectarian politics.
Since the communal forces have been in power, they are fast implementing their sectarian agendas. The secular educational and research institutions are being attacked and their progressive characters are being changed.
The sole agenda of the communal forces is to keep the fire of Hindus versus Muslims aflame.
All those who disagree with their narrow and sectarian politics are being demonized as "anti-national". To justify their position, the communalists are trying to paint India as the land of “Hindus”.
The communal forces have very little respect for the methods of history writing. In their conception, history remains frozen and it is projected in a binary. The communalists are trying to erase all contradictions. They love to operate within stereotyped images of Hindus and Muslims.
This poses a serious challenge to the secular character of India. The secular scholars, therefore, have no option but to wage an intellectual battle against the saffronisation of history writing.
In an article published in the Urdu daily Inquilab (September 20, 2022), I discuss some of these issues.
For more, click this video file.

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