सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Sexual harassment at workplace: File FIR based on complaints by sportspersons

As the Delhi Police Commissioner refused to meet a delegation of the National Federation of Indian Women (NFIW) they staged a protest at the Delhi Police Head Quarters (PHQ) at Jai Singh Road, Central Delhi. NFIW members went to the PHQ to submit a memorandum to the Police Commissioner demanding immediate filing of an FIR based on the complaint given by young women wrestlers.
The protesters led by Annie Raja, General Secretary NFIW were detained by the police and taken to the Parliament Street police station and the DCP received the memorandum, addressed to Sanjay Arora, Commissioner of Police. Later they joined the wrestlers who were sitting on a day and night dharna at Jantar Mantar. Text of the memorandum:

***
The National Federation of Indian Women (NFIW) hereby registers its strong protest at the failure of Delhi Police to register an FIR on the complaints filed by the women wrestlers against Mr. Brij Bhushan Sharan Singh, WFI President and MP.
Filing of FIR is the primary legal step of the justice process on complainants of sexual harassment. The POSH Act clearly states that the police is required to file an FIR and then investigate the crime, and not the other way round.
National Women wrestlers have accused the WFI president of criminal intimidation and sexual harassment.
The complainants are those young women who won national and international laurels for the country. With their sweat, on many occasions, our National Flag was proudly hoisted, as the winning country, standing tall over others. The entire Nation celebrates the victories of these young enthusiastic women who have brought glory to the country, as theirs.
The complainant also includes a minor, yet the police have failed to alert the NCPCR or file an FIR!! The charges are serious and require immediate actions from the police for justice to be delivered. It is not only shocking but shameful too to see the delay and reluctance of the Delhi police to file FIR and the criminal violation of POSH Act by them.
Our Constitution and legal system ensure that even verbal abuse is penalized and justice be delivered to the aggrieved. The primary job of the police is to safeguard the rights of the survivors of sexual harassment and violence. The Delhi police have been repeatedly found guilty of not filing FIRs but harassing the complainants. It is clear patriarchy, money and muzzle power that play a major role in this.
When internationally popular young women wrestlers have to stage day and night dharna for justice, how can the other women of Delhi trust and expect justice from the police.
Therefore, NFIW demands
 Immediate filing of FIR against Brij Bhushan Sharan Singh based on the complaints given by the sportspersons. These are cases of sexual harassment at workplace and POCSO.
 Ensure time bound legal process to ensure justice to the complainant as early as possible.
 Action against all those police personnel who failed to file FIR, timely, on the complaint.
 Immediate steps for Gender sensitization and awareness programme for Delhi Police on woman and child centric Laws. It is critical for safeguarding the dignity, safety and security of women in Delhi.

टिप्पणियाँ

ट्रेंडिंग

हिंदी आलोचना जैसे पिछड़ चुके अनुशासन की जगह हिंदी वैचारिकी का विकास जरूरी

- प्रमोद रंजन*   भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक व प्रतिक्रियावादी ताकतों को सत्ता तक पहुंचाने में हिंदी पट्टी का सबसे बड़ा योगदान है। इसका मुख्य कारण हिंदी-पट्टी में कार्यरत समाजवादी व जनपक्षधर हिरावल दस्ते का विचारहीन, अनैतिक और  प्रतिक्रियावादी होते जाना है। अगर हम उपरोक्त बातों को स्वीकार करते हैं, तो कुछ रोचक निष्कर्ष निकलते हैं। हिंदी-जनता और उसके हिरावल दस्ते को विचारहीन और प्रतिक्रियावादी बनने से रोकने की मुख्य ज़िम्मेदारी किसकी थी?

ગુજરાતના સ્થાપના દિવસે યાદ કરીએ ભારતના વિશ્વપ્રસિદ્ધ ગુજરાતી પુરાતત્વવિદ્ ને

- ગૌરાંગ જાની*  આજે કોઈ ગુજરાતી એ કલ્પના પણ ન કરી શકે કે વર્ષ ૧૮૩૯ માં જૂનાગઢમાં જન્મેલા એક ગુજરાતી વિશ્વ પ્રસિદ્ધ બની શકે! પણ આપણે એ ગુજરાતીને કદાચ વિસરી ગયા છીએ જેમણે ગિરનારના અશોક શિલાલેખને દોઢસો વર્ષ પૂર્વે ઉકેલી આપ્યો.આ વિદ્વાન એટલે ભગવાનલાલ ઈન્દ્રજી. ૭ નવેમ્બર, ૧૮૩૯ ના દિવસે જૂનાગઢના પ્રશ્નોરા નાગર બ્રાહ્મણ પરિવારમાં તેમનો જન્મ થયો હતો. જૂનાગઢના એ સમયે અંગ્રેજી શિક્ષણની સગવડ ન હોવાને કારણે તેમને અંગ્રેજી ભાષાનું જ્ઞાન ન હતું પણ પાછળથી તેમણે ખપ પૂરતું અંગ્રેજી જાણી લીધું હતું.

Under Modi, democracy is regressing and economy is also growing slowly

By Avyaan Sharma*   India is "the largest democracy in the world", but now its democracy is regressing and its economy is also growing slowly. What has PM Modi's ten years in power brought us? Unemployment remains high. Joblessness is particularly high among India's youth - with those aged 15 to 29 making up a staggering 83% of all unemployed people in India, according to the "India Employment Report 2024", published last month by the International Labour Organisation (ILO) and the Institute of Human Development (IHD). The BJP-led government did not provide jobs to two crore youth in a year as was promised by Modi in the run up to the 2014 general elections.

नफरती बातें: मुसलमानों में असुरक्षा का भाव बढ़ रहा है, वे अपने मोहल्लों में सिमट रहे हैं

- राम पुनियानी*  भारत पर पिछले 10 सालों से हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज कर रही है. भाजपा आरएसएस परिवार की सदस्य है और आरएसएस का लक्ष्य है हिन्दू राष्ट्र का निर्माण. आरएसएस से जुड़ी सैंकड़ों संस्थाएँ हैं. उसके लाखों, बल्कि शायद, करोड़ों स्वयंसेवक हैं. इसके अलावा कई हजार वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं जिन्हें प्रचारक कहा जाता है. भाजपा के सत्ता में आने के बाद से आरएसएस दुगनी गति से हिन्दू राष्ट्र के निर्माण के अपने एजेण्डे को पूरा करने में जुट गया है. यदि भाजपा को चुनावों में लगातार सफलता हासिल हो रही है तो उसका कारण है देश में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक मुद्दों का बढ़ता बोलबाला. इनमें से कुछ हैं राम मंदिर, गौमांस और गोवध एवं लव जिहाद. 

Laxmanpur Bathe massacre: Perfect example of proto-fascist Brahmanical social order

By Harsh Thakor  The massacre at Laxmanpur-Bathe of Jehanabad in Bihar on the night of 1 December in 1997 was a landmark event with distinguishing features .The genocide rightly shook the conscience of the nation in the 50th year of Indian independence. The scale of the carnage was unparalleled in any caste massacre. It was a perfect manifestation of how in essence the so called neo-liberal state was in essence most autocratic. 

ભારતમાં જિસસ ક્રાઈસ્ટના દર્શન, ખ્રિસ્તી ધર્મના આગમનને કારણે સમાજ વ્યવસ્થામાં પરિવર્તન

- ઉત્તમ પરમાર  મારી કિશોર અવસ્થામાં કેટલાક ચિત્રો અને મૂર્તિઓએ હૃદયમાં એવું સ્થાન જમાવ્યું છે કે આજદિન પર્યંત  ઉત્તરોઉત્તર વિકસતું જ રહ્યું છે. પ્રેમ કરુણાના મૂર્તિમંત અવતાર  જિસસ ક્રાઈસ્ટને વધુસ્તંભે ચઢાવેલી મૂર્તિ  મારી કોઈપણ ધર્મ વિશેની સમજ નહોતી ત્યારથી મારા હૃદયમાં સ્થાપિત થયેલી છે. મારા ઘરની દિવાલ પર વધસ્તંભે ચઢેલા જીસસની પ્રતિમા જોઈને કોઈ મને પૂછી બેસતું કે તું ક્રિશ્ચન છે?

रैंकिंग: अधिकांश भारतीय विश्वविद्यालयों का स्तर बहुत गिरा, इस साल भी यह गिरवाट जारी

- प्रमोद रंजन*  अप्रैल, 2024 में भारतीय विश्वविद्यालयों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च रैंकिंग की चर्चा रही। मीडिया ने इसका उत्सव मनाया। लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिग में अच्छा स्थान मिलने की खबरें, कुछ संस्थानों को इक्का-दुक्का विषयों में मिले रैंक के आधार पर चुनिंदा ढंग से प्रकाशित की गईं थीं। वास्तविकता यह है कि हाल के वर्षों में हमारे अधिकांश विश्वविद्यालयों का स्तर बहुत गिर गया है। इस साल भी यह गिरवाट जारी रही है।

नोएडा में मैन्युअल स्कैवेंजर्स की मौत: परिवारों को मुआवजा नहीं, प्राधिकरण ने एफआईआर नहीं की

- अरुण खोटे, संजीव कुमार*  गत एक सप्ताह में, उत्तर प्रदेश में सीवर/सेप्टि क टैंक सफाई कर्मियों की सफाई के दौरान सेप्टिक टैंक में मौत। 2 मई, 2024 को, लखनऊ के वज़ीरगजं क्षेत्र में एक सेवर लाइन की सफाई करते समय शोब्रान यादव, 56, और उनके पत्रु सशुील यादव, 28, घटुन से हुई मौत। एक और घटना 3 मई 2024 को नोएडा, सेक्टर 26 में एक घर में सेप्टि क टैंक को सफाई करते समय दो सफाई कर्मचर्मारी नूनी मडंल, 36 और कोकन मडंल जिसे तपन मडंल के नाम से जानते हैं, की मौत हो गई। ये सफाई कर्मचर्मारी बंगाल के मालदा जिले के निवासी थे और नोएडा सेक्टर 9 में रहते थे। कोकन मडंल अपनी पत्नी अनीता मडंल के साथ रहते थे। इनके तीन स्कूल जाने वाले बच्चे हैं जो बंगाल में रहते हैं। नूनी मडंल अपनी पत्नी लिलिका मडंल और अपने पत्रु सजुान के साथ किराए पर झग्गी में रहते थे। वे दैनिक मजदरूी और सफाई कर्मचर्मारी के रूप में काम करते थे।

प्राचीन भारत के लोकायत संप्रदाय ने कुछ परजीवियों की खूब खबर ली: प्रमुख प्रस्थापनायें

- राणा सिंह   भारत में परजीवियों का एक विशाल समूह है जो बोलता है कि “सब कुछ माया है”,  लेकिन व्यवहार में यह समूह सारी जिंदगी इसी “माया” के पीछे पागल रहता है।  प्राचीन भारत के लोकायत संप्रदाय ने इन परजीवियों की खूब खबर ली थी।

बिहार के ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के खंडहरों की परिक्रमा का रोमांचक अवसर

- सुमन्त शरण  कुछ दिन पहले एक सुदूर ग्रामीण अंचल (पीरपैंती)  से तकरीबन डेढ़-दो घंटे की दूरी पर अवस्थित ऐतिहासिक बौद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय (के अवशेषों) की परिक्रमा का अवसर मिला। विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। 8वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के अंत तक यह विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक हुआ करता था। कहा जाता है कि यह अपने कुछेक अत्यंत अनूठे नवाचार के चलते उस समय नालंदा विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी था। हालांकि, मान्यता यह भी है कि अल्प अवधि के लिए दोनों विश्वविद्यालय के बीच शिक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्रों में घनिष्ठ पारस्परिक संबंध एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान का सिलसिला भी रहा था। यह विश्वविद्यालय तंत्रशास्त्र की पढ़ाई के लिए सबसे ज्यादा विख्यात था। इस विषय का एक सबसे विख्यात छात्र अतीसा दीपनकरा था, जो बाद में तिब्बत जाकर बौद्ध हो गया। इसके प्रथम कुलपति ज्ञान अतिस थे।