Skip to main content

Unsung, tens of Morbi youth of local fishing community saved many, many lives

By Rajiv Shah 

It was indeed a treat to listen to Bhavik Raja, who spoke at a meeting of the Movement for Secular Democracy the other day in Ahmedabad. Speaking in chaste Gujarati, Raja recalled his childhood days in Mobi when he and his friends would often go to the town's Jhulto Pul (Hanging Bridge) in free time. I listened to him online.
The bridge, which should have been given a heritage status, was handed over to the owners of a watch-making tycoon for repair. The repair was carried out so shoddily that it broke down in less than a week after it was opened for general public, leading to the death of more than 140 persons, many of them children.
Raja, who formed a group of three-person activists' team on a fact-finding mission to Mobi, said, what isn't taken note of is how tens of youth, belonging to the local Muslim fishing community, jumped into the river and saved many, many lives. It's a marshy river, and to navigate in there is an extremely difficult exercise.
Acording to Raja, the disaster management team came only on the next day, while these youth, without thinking about anything, jumped in the river immediately after the disaster struck the bridge at around 6:30 pm on October 30. Had these youth, so far unsung, not done this, the death toll would have been much higher.
One only needs to listen to what Raja said during his 15 minute intervention -- provided, of course, you know Gujarati. He compared the Morbi youths' herculean task with the way Kashmiri youth faced a flood disaster that struck Jammu & Kashmir years ago. The youthful spirit is inspiring, whether Morbi or J&K, he added.

Comments

TRENDING

हिंदी आलोचना जैसे पिछड़ चुके अनुशासन की जगह हिंदी वैचारिकी का विकास जरूरी

- प्रमोद रंजन*   भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक व प्रतिक्रियावादी ताकतों को सत्ता तक पहुंचाने में हिंदी पट्टी का सबसे बड़ा योगदान है। इसका मुख्य कारण हिंदी-पट्टी में कार्यरत समाजवादी व जनपक्षधर हिरावल दस्ते का विचारहीन, अनैतिक और  प्रतिक्रियावादी होते जाना है। अगर हम उपरोक्त बातों को स्वीकार करते हैं, तो कुछ रोचक निष्कर्ष निकलते हैं। हिंदी-जनता और उसके हिरावल दस्ते को विचारहीन और प्रतिक्रियावादी बनने से रोकने की मुख्य ज़िम्मेदारी किसकी थी?

साहित्य बोध में परिवर्तन: सत्तर के दशक में विचारधारा का महत्व बहुत अधिक था

- अजय तिवारी   सत्तर के बाद वाले दशक में जब हम लोग साहित्य में प्रवेश कर रहे थे तब दाढ़ी रखने, बेतरतीबी से कपड़े पहनने और फक्कड़पन का जीवन जीने वाले लोग बेहतर लेखक हुआ करते थे या बेहतर समझे जाते थे। नयी सदी में चिकने-चुपड़े, बने-ठने और खर्चीला जीवन बिताने वाले सम्मान के हक़दार हो चले हैं। यह फ़र्क़ जनवादी उभार और भूमण्डलीय उदारीकरण के बीच का सांस्कृतिक अंतर उजागर करता है। 

How Mahakavi Sri Sri defined political and cultural metamorphosis of Telugu society

By Harsh Thakor  Srirangam Srinivasarao, popularly known as Sri Sri, or called Mahakavi (The Great Poet), held a reputation like no other Telugu poet. Today, on June 15th, we commemorate his 40th death anniversary. Sri Sri transcended heights in revolutionary creativity or exploration, unparalleled, in Telegu poetry, giving it a new dimension. His poems projected the theme or plight of the oppressed people at a scale, rarely penetrated by poets, giving revolutionary poetry it’s soul.

Laxmanpur Bathe massacre: Perfect example of proto-fascist Brahmanical social order

By Harsh Thakor  The massacre at Laxmanpur-Bathe of Jehanabad in Bihar on the night of 1 December in 1997 was a landmark event with distinguishing features .The genocide rightly shook the conscience of the nation in the 50th year of Indian independence. The scale of the carnage was unparalleled in any caste massacre. It was a perfect manifestation of how in essence the so called neo-liberal state was in essence most autocratic. 

एनडीए सरकार में हिन्दू राष्ट्रवाद की दिशा: मुसलमानों का हाशियाकरण जारी रहेगा

- राम पुनियानी*  लोकसभा आमचुनाव में भाजपा के 272 सीटें हासिल करने में विफल रहने के बाद एनडीए एक बार फिर नेपथ्य से मंच के केंद्र में आ गया है. सन 1998 में अटलबिहारी वाजपेई एनडीए सरकार के प्रधानमंत्री बने थे. उस सरकार के कार्यकलापों पर भी भाजपा की राजनीति का ठप्पा था. उस सरकार ने हिंदुत्व के एजेंडे के अनुरूप संविधान की समीक्षा के लिए वेंकटचलैया आयोग नियुक्त किया, पाठ्यपुस्तकों का भगवाकरण किया और ज्योतिषशास्त्र व पौरोहित्य को विषय के रूप में पाठ्यक्रम में जोड़ा. सन 2014 और 2019 में बनी मोदी सरकारें तकनीकी दृष्टि से भले ही एनडीए की सरकारें रही हों मगर चूँकि भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल था इसलिए अन्य घटक दल साइलेंट मोड में बने रहे और भाजपा ने बिना रोकटोक अपना आक्रामक हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडा लागू किया. इसमें शामिल था राममंदिर का निर्माण और अनुच्छेद 370 का कश्मीर से हटाया जाना. इसके अलावा सरकार की मौन सहमति से गाय और बीफ के नाम पर मुसलमानों की लिंचिंग की गयी और लव जिहाद और न जाने कितने अन्य किस्मों के जिहादों की बातें की गईं.

सदन की सबसे उंची गद्दी पर बैठे यह शख्स मर्यादाओं को अनदेखा कर मुंह फेरता रहा

- मनीष सिंह*   ओम बिड़ला को जब याद किया जाएगा, तो लोगों के जेहन मे भावहीन सूरत उभरेगी। सदन के सबसे उंची गद्दी पर बैठा शख्स, जो संसदीय मर्यादाओं को तार तार होते सदन मे अनजान बनकर  मुंह फेरता रहा।  मावलंकर, आयंगर, सोमनाथ चटर्जी और रवि राय ने जिस कुर्सी की शोभा बढाई, उसे उंचा मयार दिया.. वहीं ओम बिड़ला इस सदन की गरिमा की रक्षा मे अक्षम स्पीकर के रूप मे याद किये जाऐंगे। 

नरेन्द्र मोदी देवत्व की ओर? 1923 में हिटलर ने अपनी तुलना भी ईसा मसीह से की थी

- राम पुनियानी*  समाज के संचालन की प्रजातान्त्रिक प्रणाली को मानव जाति ने एक लम्बे और कठिन संघर्ष के बाद हासिल किया. प्रजातंत्र के आगाज़ के पूर्व के समाजों में राजशाही थी. राजशाही में राजा-सामंतों और पुरोहित वर्ग का गठबंधन हुआ करता था. पुरोहित वर्ग, धर्म की ताकत का प्रतिनिधित्व करता था. राजा को ईश्वर का प्रतिरूप बताया जाता था और उसकी कथनी-करनी को पुरोहित वर्ग हमेशा उचित, न्यायपूर्ण और सही ठहराता था. पुरोहित वर्ग ने बड़ी चतुराई से स्वर्ग (हैवन, जन्नत) और नर्क (हैल, जहन्नुम) के मिथक रचे. राजा-पुरोहित कॉम्बो के आदेशों को सिर-आँखों पर रखने वाला पुण्य (सबाब) करता है और इससे उसे पॉजिटिव पॉइंट मिलते हैं. दूसरी ओर, जो इनके आदेशों का उल्लंघन करता है वह पाप (गुनाह) करता है और उसे नेगेटिव पॉइंट मिलते हैं. व्यक्ति की मृत्यु के बाद नेगेटिव और पॉजिटिव पॉइंटों को जोड़ कर यह तय किया जाता है कि वह नर्क में सड़ेगा या स्वर्ग में आनंद करेगा.