सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Educationist, popular historian Sohail Hashmi targeted under oppressive UAPA

Statement in support of veteran cultural activist Sohail Hashmi, whose house was raided in Delhi along with that of several senior journalists on October 3 morning, endorsed by nearly 600 individuals:
***
We the undersigned strongly condemn the Delhi police special cell action against journalists including Urmilesh, Abhisar Sharma, Bhasha Singh, Githa Hariharan, Aunindyo Chakravarthy, Sumedha Pal, D Raghunandan, Sanjay Rajaura, Aditi Nigam and several others. Along with these names we would like to register our condemnation on the harassment of Mr. Sohail Hashmi.
Around 6 am on 3rd October 2023 Delhi police special cell raided Sohail Hashmi’s house, in the Newsclick case which is now being investigated under the draconian Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA). His family was harassed in early morning commotion where police personnel barged into his house, including his and his daughter’s bedroom. The cops have eventually seized his personal computer, hard disc along with the flash drives – all containing significant files of his work life. This raid in the name of law was one among many similar such attacks carried out by the special cell in the NCR today, where scores of journalists, intellectuals and activists have been questioned – while some have been taken for further questioning – and their personal works have been seized.
We the strongly condemned this outrageously fiendish act of the government whereby they are hellbent to stifle every dissenting voice with vicious impunity.
We of course not be silenced by such intimidating tactics of the government where an educationist, film maker, a popular historian, a person committed to the secular fabric of the country like Sohail Hashmi is being targeted in an investigation under oppressive UAPA. The law which is infamous for wilfully targeting the members of minority community in its brief history of tyrannical operation is well documented by now. We would like to put it on record that Sohail Hashmi’s work, if it’s about anything, it is about cherishing and preserving India’s unique composite culture and its intellectual history. His work among children and on inculcating the conserving ethics about our shared history and heritage doesn’t require any further introduction. We are particularly appalled at the behaviour met to senior citizens like Sohail Hashmi, and numerous others whose houses have been raided today and were treated like criminals.
We would like to emphasise that the investigation now being made under UAPA should desist from framing innocent citizens exercising their constitutional right. We appeal all to come together in strengthening the hands of journalists, and intellectuals in such dire times and call out the wretched tactics of the government of the day in one voice.
---
Click here for those who have endorsed the statement

टिप्पणियाँ

ट्रेंडिंग

हिंदी आलोचना जैसे पिछड़ चुके अनुशासन की जगह हिंदी वैचारिकी का विकास जरूरी

- प्रमोद रंजन*   भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक व प्रतिक्रियावादी ताकतों को सत्ता तक पहुंचाने में हिंदी पट्टी का सबसे बड़ा योगदान है। इसका मुख्य कारण हिंदी-पट्टी में कार्यरत समाजवादी व जनपक्षधर हिरावल दस्ते का विचारहीन, अनैतिक और  प्रतिक्रियावादी होते जाना है। अगर हम उपरोक्त बातों को स्वीकार करते हैं, तो कुछ रोचक निष्कर्ष निकलते हैं। हिंदी-जनता और उसके हिरावल दस्ते को विचारहीन और प्रतिक्रियावादी बनने से रोकने की मुख्य ज़िम्मेदारी किसकी थी?

नफरती बातें: मुसलमानों में असुरक्षा का भाव बढ़ रहा है, वे अपने मोहल्लों में सिमट रहे हैं

- राम पुनियानी*  भारत पर पिछले 10 सालों से हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज कर रही है. भाजपा आरएसएस परिवार की सदस्य है और आरएसएस का लक्ष्य है हिन्दू राष्ट्र का निर्माण. आरएसएस से जुड़ी सैंकड़ों संस्थाएँ हैं. उसके लाखों, बल्कि शायद, करोड़ों स्वयंसेवक हैं. इसके अलावा कई हजार वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं जिन्हें प्रचारक कहा जाता है. भाजपा के सत्ता में आने के बाद से आरएसएस दुगनी गति से हिन्दू राष्ट्र के निर्माण के अपने एजेण्डे को पूरा करने में जुट गया है. यदि भाजपा को चुनावों में लगातार सफलता हासिल हो रही है तो उसका कारण है देश में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक मुद्दों का बढ़ता बोलबाला. इनमें से कुछ हैं राम मंदिर, गौमांस और गोवध एवं लव जिहाद. 

देशव्यापी ग्रामीण भारत बंध में उतरे मध्य प्रदेश के आदिवासी, किया केंद्र सरकार का विरोध

- हरसिंग जमरे, भिखला सोलंकी, रतन अलावे*  15 और 16 फरवरी को निमाड के बड़वानी, खरगोन और बुरहानपुर में जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में आदिवासी महिला-पुरुषों ग्रामीण भारत बंद में रैली एवं विरोध प्रदर्शन किया । प्रधान मंत्री द्वारा 2014 में फसलों की लागत का डेढ़ गुना भाव देने का वादा किया गया था, 2016 में किसानों की आय दुगना करने का वादा किया गया था । आज, फसलों का दाम नहीं बढ़ रहा है, लेकिन खेती में खर्च बढ़ता जा रहा है! खाद, बीज और दवाइयों का दाम, तीन-चार गुना बढ़ चुका है! किसानों को लागत का डेढ़ गुना भाव देने के बजाए, खेती को कंपनियों के हवाले करने के लिए 3 काले कृषि कानून लाए गए । 3 काले कानून वापस लेते समय प्रधान मंत्री ने फिर वादा किया था कि फसलों की लागत का डेढ़ गुना भाव की कानूनी गारंटी के लिए कानून बनाएँगे, लेकिन वो भी झूठ निकला! आज जब देश के किसान दिल्ली में आपको अपना वादा याद दिलाने आए है, तब आप उनका रास्ता रोक रहें है, उनके साथ मारपीट कर उन पर आँसू गैस फेंक रहें हैं, उन पर छर्रों से फायरिंग कर रहें है! देश को खिलाने वाला किसान खुद भूखा रहे, क्या यही विकास है?

18થી નાની ઉંમરના 1,15,129 બાળકો શાળા બહાર? વાસ્તવિક આંકડો 15-20 ગણો વધું

- સુખદેવ પટેલ*  16 એપ્રિલથી સમગ્ર ગુજરાતમાં શાળા બહારના 6 થી 19 વર્ષની ઉંમરના બાળકોનો સર્વે શરૂ થયો છે.  જે 26 એપ્રિલ સુધી ચાલશે. જેની જવાબદારી સરકારી શાળાના શિક્ષકોને સોંપવામાં આવી છે. અત્યારે પ્રાથમિક શાળાઓમાં વાર્ષિક પરીક્ષાઓ ચાલી રહી છે. લોકસભાની ચૂંટણીઓના કામ પણ શિક્ષકોને ભાગે કરવાના આવશે. શિક્ષકો કેટલું કરી શક્શે? શિક્ષકો પાસેથી વ્યાજબી રીતે કેટલી અપેક્ષાઓ રાખવી જોઈએ? RTE ની જોગવાઈઓ મુજબ દરેક બાળક શિક્ષણ મેળવી શકે, તે માટે શાળા બહારના બાળકોને સર્વે કરીને શોધી કાઢવાનું ઉમદા કામ સરકાર વિચારે છે, તે આવકારદાયક છે. આવાં ઉત્તમ કામમાં જેમને સીધો લાભ થવાનો છે,  તેવાં હિતધારકોની પ્રતિનિધિ સમિતિ SMC સ્કૂલ મેનેજમેન્ટ કમિટી આ જવાબદારી સારી રીતે ઉપાડી શકે તેમ છે. શિક્ષણ વિભાગ SSA તરફથી આ કામગીરીમાં SMC ની ભાગીદારીનું આયોજન કરીને યોગ્ય માર્ગદર્શિકા તૈયાર કરવી જોઈએ.

How the slogan Jai Bhim gained momentum as movement of popularity and revolution

By Dr Kapilendra Das*  India is an incomprehensible plural country loaded with diversities of religions, castes, cultures, languages, dialects, tribes, societies, costumes, etc. The Indians have good manners/etiquette (decent social conduct, gesture, courtesy, politeness) that build healthy relationships and take them ahead to life. In many parts of India, in many situations, and on formal occasions, it is common for people of India to express and exchange respect, greetings, and salutation for which we people usually use words and phrases like- Namaskar, Namaste, Pranam, Ram Ram, Jai Ram ji, Jai Sriram, Good morning, shubha sakal, Radhe Radhe, Jai Bajarangabali, Jai Gopal, Jai Jai, Supravat, Good night, Shuvaratri, Jai Bhole, Salaam walekam, Walekam salaam, Radhaswami, Namo Buddhaya, Jai Bhim, Hello, and so on.

Laxmanpur Bathe massacre: Perfect example of proto-fascist Brahmanical social order

By Harsh Thakor  The massacre at Laxmanpur-Bathe of Jehanabad in Bihar on the night of 1 December in 1997 was a landmark event with distinguishing features .The genocide rightly shook the conscience of the nation in the 50th year of Indian independence. The scale of the carnage was unparalleled in any caste massacre. It was a perfect manifestation of how in essence the so called neo-liberal state was in essence most autocratic. 

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय बीमा आधारित सेवाओं को प्राथमिकता क्यों?

- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान  वैश्विक स्तर पर “विश्व स्वास्थ्य दिवस” इस साल “हमारा स्वास्थ्य, हमारा अधिकार” की अवधारणा को केन्द्रित कर मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अधिकार संघर्ष को मजबूत करने के लिए, संवैधानिक और नीतिगत रूप में स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने के लिए, स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों को लोगों के हक के लिए संगठित करने, जागरूक करने और स्वास्थ्य के मानकों पर कार्य करने हेतु तथा सरकार को जनता के प्रति जिम्मेदार बनाने हेतु जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय ने स्वास्थ्य अधिकार अभियान के माध्यम से जनता के पक्ष को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अधिकार के मुद्दे पर सक्रिय रूप से कार्य करेगा।

અમદાવાદ પોલિસ કમિશનરનું જાહેરનામું: નાગરિક સ્વાતંત્ર્ય પર તરાપ મારવાની પ્રક્રિયાનો એક ભાગ

- હેમંતકુમાર શાહ  અમદાવાદના પોલિસ કમિશનરનું લોકશાહી વિરોધી વધુ એક પગલું ચૂંટણી ટાણે જોવા મળ્યું છે.   તા. ૧૬-૦૪-૨૦૨૪ના રોજ તેમણે એક જાહેરનામું બહાર પાડીને ફોજદારી કાર્યવાહી અધિનિયમ-૧૯૭૩ની કલમ-૧૪૪ આખા શહેરમાં લાગુ કરી જણાવ્યું છે કે "કોઈ પણ પ્રચારપ્રસાર રેલી દરમ્યાન કોઈ એ કાળા વાવટા ફરકાવવા નહિ કે ઉશ્કેરણીજનક બેનર કે પ્લે કાર્ડ બતાવવું નહિ અથવા કોઈ વિરોધમાં ઉશ્કેરણીજનક સૂત્રોચ્ચાર કરવો નહિ."

न नौकरियाँ, न पर्याप्त मजदूरी, न राहत: अनौपचारिक श्रमिकों के लिए मोदी की विरासत

- प्रतिनिधि द्वारा  भारत में वास्तविक मज़दूरी 2014-15 के बाद से नहीं बढ़ी है, जबकि देश की जीडीपी जरूर बेहतर हुई है। इस दौरान देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था भी थम सी गई है। देश के अनौपचारिक श्रमिकों का जीवन बेहद अनिश्चित है, खासकर झारखंड जैसे राज्यों में जहां अनौपचारिक रोजगार लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत है।

क्या कांग्रेस का घोषणापत्र मुस्लिम लीग की सोच को प्रतिबिंबित करता है?

- राम पुनियानी गत 4 अप्रैल 2024 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 2024 के आमचुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया. पार्टी ने इसे 'न्याय पत्र' का नाम दिया है. इसमें जाति जनगणना, आरक्षण पर 50 प्रतिशत की ऊपरी सीमा हटाने, युवाओं के लिए रोज़गार, इंटर्नशिप की व्यवस्था, गरीबों के लिए आर्थिक मदद आदि का वायदा किया गया है. घोषणापत्र का फोकस महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, ओबीसी, किसानों और युवाओं व विद्यार्थियों के लिए न्याय पर है. कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि घोषणापत्र यह वादा करता है कि भाजपा के पिछले 10 सालों के शासनकाल में समाज के विभिन्न तबकों के साथ हुए अन्याय को समाप्त किया जाएगा.