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Israel-Palestine conflict: India has to clarify which side of history it supports

By Vidya Bhushan Rawat*

'Ruled based' hypocrisy openly visible in 'liberal' democratic' 'spaces' of western media. How long this rule based destruction be allowed in #Gaza? When will #Israel be made accountable for the horrific crime against humanity in #Palestine?
This is an unprecedented crisis purely created by the western world and it's hypocrisy in defining and building narrative about Palestine. A historic issue was kept deliberately boiling so to control puppet authoritarian regimes in the middle east. Even a resolution Regarding #Israel is opposed vehemently by the 'rule based ' colonial democracies.
India has to see which side of the history it supports. Historical facts are that India supported Palestinian right to exist like Israel. We can't allow the killing of innocent citizens and bombing of hospitals. How do you tolerate killing of children.
In this age of propaganda, we need to be extremely careful of forwarding any video or photograph but let us be clear that it is the issue of denial of rights to Palestine. It is not a Jews Muslim issue. The Jews were victimized by the Germans and Europeans but the jews have their anger on Palestinian and this is the biggest irony.
For the Manustream 'tamashbins' enjoying these bombing and killings, I can only say that nothing is bigger than living together and respecting each other's values. We have lived together side by side and for centuries and that is the only solution. Hatred never result in any solution. Israel has best technology but still it lives in uncertainty. It can destroy Gaza but created more enemies than it could handle. The people are now asking question. You cannot keep your country on tenterhooks for ever as democratic societies can't function in military machoism. Ultimately, war has never brought any solution. The real danger is the escalation and it must not be allowed.
Let good sense prevail.
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*Human rights defender

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