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Terror unleashed against people of Nigeria: Drone strike conducted on innocent civilians

By Harsh Thakor* 

Murderous State’s drone attack killed at least 88 persons in Tudun Biri village, Kaduna, Nigeria,on December 5th. At least 88 people have been killed in a mistaken army drone attack” on a religious gathering, the Mawlid al-Nabi (the birthday of Prophet Muhammad), in the northwest of Nigeria. This ruthless attack is part of a series of cynically so-called mistakes” in the war of the Nigerian regime against the people.
Children, women and elderly who have been slaughtered are already buried. At least 66 people were victims of injury. During the last few years about 400 civilians have been assassinated by airstrikes, while the military claiming it was targeting armed groups.”
The attack on Sunday night in Tudun Biri village of Kaduna state’s Igabi council area took place as Muslims assembled to observe the holiday celebrating the birthday of the Prophet Muhammad. Kaduna Governor Uba Sani said civilians were “mistakenly killed and many others were wounded” by a drone “targeting terrorists and bandits”.
The last victims of the State’s terror were killed Sunday night by drones. Nigeria’s military often undertakes bombings to mercilessly crush the rebellion that turned Nigeria’s north for more than a decade into a disaster of the old State.
This year’s January, 39 people were killed in Nasarawa and in December 2022, as well, dozens were murdered in Zamfara. Nigerian officials use the same pretext to “explain” the merciless terror they unleash against the people as the genocidal Zionists do –alleging rebels were taking refuge among civilians using them as human-shields It leaves no stone unturned to preserve the semi-colonial and semi-feudal conditions and its patronise, bureaucrat-capitalist-big-landlord-State, country-selling lackey of imperialism.
Nigeria’s military frequently conducts air raids in the pretext of crushing the extremist violence and rebel attacks that have destabilized Nigeria’s north for more than a decade, often leaving civilian casualties at their mercy, including in January when dozens were killed in Nasarawa state and in December 2022 when dozens also died in Zamfara state.
Nigerian President Bola Tinubu ordered “a thorough and full-fledged investigation into the incident.” Even more cynical was the attendance of the Chief of Army, Taoreed Lagbaja, for praying at the graves with other representatives of the old society. Such “investigations” are often immersed in secrecy and their outcomes never revealed.. In the eyes of the people the old regime is guilty and the product will be presented sooner or later. Even imperialist institutions and therefore their tools, mainly of Yankee-imperialism, like Human Rights Watch admit that there is “no justice” in Nigeria. Amnesty International concluded, the people “are the ones paying the price”.
Nigeria’s army chief, Lt. Gen. Taoreed Lagbaja, apologized for the drone strike during a visit to the village Tuesday and said it had been carried out "based on the observation of some tactics usually employed by bandits.”
“Unfortunately, the reports we got revealed it was innocent civilians that the drone conducted a strike on,” Lagbaja said.
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*Freelance journalist

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